वीडियो कॉलिंग का 2020 में हर जगह इस्तेमाल हुआ। जूम से अप्रैल में रोज 30 करोड़ से ज्यादा मीटिंग होती थीं। लेकिन यह संचार का एक सीमित माध्यम है। इसलिए टेक कंपनियां अब वर्क फ्रॉम होम के दौरान लोगों को व्यस्त रखने के लिए नए तरीके आजमा रही हैं।

नई दिल्ली, जेएनएन। 2020 ऐसा साल था, जब बड़ी संख्या में लोगों ने वर्क फ्रॉम होम मोड में काम किया। माना जा रहा है कि कई देशों में वैक्सीन लगने की प्रक्रिया के दौरान यह जारी रहेगा। वहीं, कई कंपनियां वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की दिशा में काम भी कर रही हैं। इसलिए माना जा रहा है कि 2021 में घर से काम नए और बेहतर रूप में सामने आएगा। उम्मीद है कि तकनीक, अच्छी सेहत और मानव कुशलता मिलकर आने वाले साल को शानदार बनाएंगे।

वीडियो कॉल में अब चेहरे के भाव पर ध्यान

वीडियो कॉलिंग का 2020 में हर जगह इस्तेमाल हुआ। जूम से अप्रैल में रोज 30 करोड़ से ज्यादा मीटिंग होती थीं। लेकिन यह संचार का एक सीमित माध्यम है। इसलिए टेक कंपनियां अब वर्क फ्रॉम होम के दौरान लोगों को व्यस्त रखने के लिए नए तरीके आजमा रही हैं, जैसे एनवीडिया (Nvidia) ने अपने वीडियो कॉल में पृष्ठभूमि की जगह मानव चेहरे के भाव को प्राथमिकता दी है। पृष्ठभूमि पर ध्यान न देने से कॉल की बैंडविड्थ कम होती है। इससे लोगों का ध्यान बॉडी लैंग्वेज और चेहरे के भाव पर जाता है और लोगों के बीच मानवीय जुड़ाव होता है। 2021 में हमारे सामने ऐसे कई प्रोजेक्ट्स आ सकते हैं। इनकी तकनीक बेहतर और सुलभ हो सकती है।

ओक्यूलस रिफ्ट और फेसबुक के इनफिनिटिव ऑफिस प्रोजेक्ट में वीआर (वर्चुअल रियलिटी) पर तेजी से काम चल रहा है।

Publish Date:Tue, 05 Jan 2021 08:24 AM (IST)Author: Vineet Sharan

वीडियो कॉलिंग का 2020 में हर जगह इस्तेमाल हुआ। जूम से अप्रैल में रोज 30 करोड़ से ज्यादा मीटिंग होती थीं। लेकिन यह संचार का एक सीमित माध्यम है। इसलिए टेक कंपनियां अब वर्क फ्रॉम होम के दौरान लोगों को व्यस्त रखने के लिए नए तरीके आजमा रही हैं।

नई दिल्ली, जेएनएन। 2020 ऐसा साल था, जब बड़ी संख्या में लोगों ने वर्क फ्रॉम होम मोड में काम किया। माना जा रहा है कि कई देशों में वैक्सीन लगने की प्रक्रिया के दौरान यह जारी रहेगा। वहीं, कई कंपनियां वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की दिशा में काम भी कर रही हैं। इसलिए माना जा रहा है कि 2021 में घर से काम नए और बेहतर रूप में सामने आएगा। उम्मीद है कि तकनीक, अच्छी सेहत और मानव कुशलता मिलकर आने वाले साल को शानदार बनाएंगे।

वीडियो कॉल में अब चेहरे के भाव पर ध्यान

वीडियो कॉलिंग का 2020 में हर जगह इस्तेमाल हुआ। जूम से अप्रैल में रोज 30 करोड़ से ज्यादा मीटिंग होती थीं। लेकिन यह संचार का एक सीमित माध्यम है। इसलिए टेक कंपनियां अब वर्क फ्रॉम होम के दौरान लोगों को व्यस्त रखने के लिए नए तरीके आजमा रही हैं, जैसे एनवीडिया (Nvidia) ने अपने वीडियो कॉल में पृष्ठभूमि की जगह मानव चेहरे के भाव को प्राथमिकता दी है। पृष्ठभूमि पर ध्यान न देने से कॉल की बैंडविड्थ कम होती है। इससे लोगों का ध्यान बॉडी लैंग्वेज और चेहरे के भाव पर जाता है और लोगों के बीच मानवीय जुड़ाव होता है। 2021 में हमारे सामने ऐसे कई प्रोजेक्ट्स आ सकते हैं। इनकी तकनीक बेहतर और सुलभ हो सकती है।

आ रहा वर्चुअल ऑफिस स्पेस

ओक्यूलस रिफ्ट और फेसबुक के इनफिनिटिव ऑफिस प्रोजेक्ट में वीआर (वर्चुअल रियलिटी) पर तेजी से काम चल रहा है। इन प्रोजेक्ट्स में आभासी वर्चुअल ऑफिस स्पेस बनाया जा रहा है। इस वर्चुअल ऑफिस में चीजें अधिक साफ और व्यवस्थित होंगी। फेसबुक इसके साथ एआर (आर्गुमेंटेड रियलिटी) को भी जोड़ना चाहता है। इससे कंपनियों में शारीरिक दूरी का पालन करते हुए मीटिंग की जा सकेगी।

स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर एना क्यूरोज बताती हैं कि कई कंपनियां कह रही हैं कि वे वर्क फ्रॉम होम जारी रखना चाहती हैं। लेकिन कर्मचारियों को ऐसी जगह की जरूरत है, जहां वे मिल सकें और बातचीत कर सकें। वर्चुअल रियलिटी से कर्मचारियों में निकटता और सहयोग की भावना बढ़ेगी।

सेहत सबसे आगे

2020 में कर्मचारियों की सेहत को काफी महत्व दिया गया। नियोक्ताओं ने पाया कि उत्पादकता और कर्मचारियों की सेहत में गहरा नाता है। इसलिए वे ऐसे नियम बना रहे हैं, जिनसे कर्मचारी खुश और मानसिक रूप से सेहतमंद रहें। भले ही वे घर से काम कर रहे हों। द चार्टर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ पर्सनल एंड डेवलपमेंट ने अपनी सालाना रिपोर्ट में दावा किया है कि 89 फीसद लोगों ने बीमार होने के बावजूद 2020 में काम किया और 73 फीसद लोग तय समय से ज्यादा काम कर रहे थे। पर अब सबका मानना है कि ये स्थितियां खत्म होनी चाहिए।

ऑटोमेशन और स्किल दोनों पर साथ काम होगा

विशेषज्ञों का मानना है कि 2021 में कर्मचारी ऑटोमेशन के साथ काम करेंगे। साथ ही अपनी मानवीय कुशलता को भी मजबूत करेंगे। कंपनियां भविष्य की वर्कफोर्स के हिसाब से काम करेंगी। दुनिया के कई शहरों, जैसे बार्सिलोना और टोरंटो के स्कूल अपने पाठ्यक्रम को कामकाजी दुनिया के हिसाब से मानवकेंद्रित बना रहे हैं। इसमें छात्रों के रटे-रटाए पाठ्यक्रम की जगह उनकी रुचि के अनुसार प्रोजेक्ट दिए जाएंगे। इसे लिक्विड लर्निंग का नाम दिया गया है। 

By Amibba

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